6/12/2015

अंतिम श्वास...

कैसे करूँ ऐतबार सनम
हर कसमें तूने तोडी़
हर वादे से मुहँ मोडे
कितना मुझे है तूने सताया
हर दिन हर पल इंतजार कराया
तू ही बता अब मैं क्या करूं?
इंतजार की घडि़याँ बंद कर दूँ?
कैसे कटी रातें तूने न जाना
दिन का चैन खोया तूने न माना
देखना कहीं देर न हो जाए
प्यार से एतबार न उठ जाए
उठ न जाए कहीं वादों से विश्वास
इंतजार में न निकल जाए
              मेरी अंतिम श्वास...
11/5/2015
8.30 am 

No comments: