3/05/2013

अलादीन का जादुई चिराग -2 : चमत्कार

                                                                       
पिछले अंक में हमने जाना था कि  हम जादुई चिराग को अपने जीवन में ला  सकते है, सकारात्मक सोच से। वह सकारात्मक सोच को जीवन में कैसे लाया जाये यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है।  सकारात्मक सोच तो धरातल ( नीवं) है।  सबसे पहले हमे नीव को मजबूत करना होगा। उसके लिए जरूरी है की आप इस लेख को खुले दिल और दिमाग से पढ़ें। बिना आलोचनात्मक रवैया अपनाये।  बस ध्यान से  पढ़िए और बाद में निर्णय कीजियेगा। 
      हमारा अवचेतन मन ही हमारे जीवन का आधार है। जाने-अनजाने जो भी नकारात्मक विचार हमारे मन में आते है, उन्हें अवचेतन मन ग्रहण करके जीवन में उतार देगा।  जैसे कि  आप सोचेंगे कि  -" मेरे जीवन में बहुत कठिनाइयाँ है। "  बस यह  आपके अवचेतन मन में गया और आपके जीवन में कठिनाइयाँ दिन-दुनी रात चौगुनी प्रगति करने लगती है।  इसलिए  सबसे पहले जरूरी है -" नाकारात्मक सोच का त्याग".  जो भी सोचे और जो भी बोले बस सकारात्मक होना चाहिए। छोटी छोटी रोजाना की बातें है जिन्हें बस बोलने का तरीका बदल दे तो काफी कुछ बदलने लग जायेगा। जैसे- " मुझे आज देरी नहीं करनी है " सोचने की जगह सोचिये-    " मुझे समय पर पहुचना है ".   " शोर मत करो " के स्थान पर -" कृपया शान्ति बनाये रखे " कहिये।  जितना हम कहेंगे " मत करो" उतना ही दिमाग वही करने जायेग। 
    
                अब हमे यह जानना है कि  ज़िन्दगी में हमारा उद्देश्य क्या है ? अंततः हम चाहते क्या है? वह क्या है जो हमे जादुई चिराग से चाहिए था?  बस  उन्ही उद्देश्यों को एक साफ़ कागज में थोड़े बड़े अक्षरों में लिख लिजिये ( सकारत्मक शैली में) और कमरे में ऐसी जगह लगा लीजिये कि  वह आपको हमेशा दिखाई दे।  फिर उसे कम से कम लगातार २१  दिनों तक खुले मन से इस तरह पढना है जैसे कि  आप कोई प्रार्थना पढते हो , जिस पर आपको १०० % यकीन हो। मन में १००% विश्वास का होना बहुत जरूरी है। १% अविश्वास भी आपके ९९ % विश्वास को खत्म कर देता है। 
आपके सकारत्मक विचार इस प्रकार हो सकते है :-
१) मै  अपने शरीर को हमेशा स्वस्थ्य रखता हूँ। 
२)  मैं दिन-प्रतिदिन तरक्की कर रहा हूँ। 
३) मेरी सोच और मेरी ज़िन्दगी सकारात्मक है। 
४)मेरी समस्या का हल पाने की मुझमे अदभुत  शक्ति है। 
इत्यादि .... 

बस इसे पढना है रोज़ सुबह और शाम, एक प्रार्थना और उपासना की तरह।  बहुत जल्द आप अपनी ज़िन्दगी में चमत्कार होते देखेंगे। 

      हमारी मान्यता ही हमारे जीवन का आधार होती है। हर व्यक्ति को वही काम या पेशा अपनाना चाहिए जो उसके दिल के करीब हो और जिसके करने से उसे ख़ुशी हासिल होती हो और वह उससे दिन के १० -१२  घंटे भी ख़ुशी -ख़ुशी कर सके। क्यूकि  जिस काम को आप ख़ुशी -ख़ुशी करेंगे उस काम में तरक्की अवश्य होगी। 

        हमारी ज़िन्दगी को सही और गलत बनाना भी हमारे ही हाथ में है। अपने पर विश्वास और साथ में बहुत सी मेहनत  सफलता का सूत्र है। ज़िन्दगी में जो कुछ भी होता है उसके पीछे कुदरत की कोई न कोई वजह जरूर होती है और वह वजह हमेशा सही ही होती है। 

   बचपन से दृढ - इच्छाशक्ति  और भगवान पर विश्वास रखना  हमे माता - पिता  ने सिखाया, बहुत सालो तक इसके इसे सही रूप से जीवन में कैसे उतारना  है हमे पता ही नहीं था और हम सोचते रहे की हमारे जीवन में बहुत कठिनाइयाँ है। पर जब आज मुड  कर देखती हूँ तो समझ आता है कि  माँ के जीवन में इतने चमत्कार कैसे हुए?  सबसे बड़ी वजह थी  उनका विश्वास और दृढ़ - इच्छाशक्ति  और हमेशा यह कहना कि -" जो होता है अच्छे के लिए होता है " और " सब ठीक हो जायेगा". और सच में काफी कुछ उनके अनुरूप होता चला गया। तूफ़ान आते है और चले भी जाते  है। 

 "आसान" करेंगे सबकुछ अगले अंक में। 


  

4 comments:

Anurag said...

Perfect !! :-)
9.5/10

Vaisshali said...

Its really amazing to get this type of comment from U Bhai.. i m thrilled n surprised too ...

Thanks a lot !!

Love U <3

( .5 kahan gaye ? :( )

anuj kumar said...

जो हम सभल ले वो गाना हैं। जींद सच मैं एक फ़साना हैं इस बात को बहुत अच्छे से समझायाआपने

Vaisshali said...

Thanks a lot Anuj ji