1/09/2008

प्रेम : भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष में

प्रेम : भारतीय संस्कृति के परिपेक्ष में

आज भी भारतीय समाज अपने दृष्टिकोण को व्यापक नही कर सका है या यू कहे की हमने अपना एक दायरा बना लीया है. मस्तिष्क से कभी उस से आगे सोचने की ज़ुर्रत भी नही कर सकते है. मेरे मन में प्रेम को लेकर हमेशा से एक सवाल रहा है की प्यार में इतना बवाल क्यों? प्रेम भारतीय संस्क्र्ती का अटूट हिस्सा है, हमारे धर्म में प्रेम को सर्वोपरी माना है, फिर समाज में क्यों नही ? क्यों हर व्यक्ति चाहता है की उसका प्रेमी,प्रेम करे पर उस के हिसाब से . प्रेम वह है जहाँ कहा जाता है की ..उससे खुला छोड़ दो, यदी वह वापस तुम्हारे पास आता है तो वह हमेशा तुम्हारा है, और नही तो वह कभी तुम्हारा था ही नही..... पर इसे स्वीकार कोई नही करता है..क्यों हर भारतीय नारी पूजा तो सबसे पहले गणेशजी की करती है पर  पतिकी कामना हमेशा राम जी जैसे पुरुष की करती है.
सभी स्वार्थी है सिर्फ अपने बारे में सोचते है..''कृष्ण'' प्रेम को सही ठहराया जाता है वही ''बटुक्नाथ'' को गलत।

पर इस स्थिति की जिम्मेदार एक स्त्री ही है, यदी वह साक्षर हो और अपने पैरो पर खड़ी हो तो क्या फर्क पड़ता है बटुक्नाथ जैसे पुरुष का जींदगी में होना या न होना..अपने आप में साक्षर होना बहुत बड़ा बल है , फिर जुली, मिली कोई भी आये क्या फर्क पड़ता है? स्त्री स्वंतंत्राता की मिसालहै आज के दौर की फिल्म.." कभी अलविदा कहना " . हर स्त्री को अपने फैसले लेने का पूरा अधीकार है, उसकी ज़िंदगी उसकी है ..कोई और उसे नही चला सकता.. आज यह फिल्म पुरुष प्रधान समाज को बहुत बुरी ही लगेगी..पर वक़्त यही आ रहा है जहाँ पुरुष के होने न होने का बहुत ज्यादा असर किसी स्त्री पर नही होगा अर्थात् हर स्त्री अपनी ज़िंदगी, प्यार की तारनहार होगी न की उसका पति, पिता या भाई.....अपने प्रेम को स्वयम ही चुंनेगी .........

4 comments:

karan said...
This comment has been removed by the author.
sempiternal said...

blog banane wale n etne sundar lkhne wale ko meri taraf se subhkamnaye.......!!! aab aapne dil ki baat blog pe utar do.....[:)]

rohitmangal21 said...

Fabulous

arpit said...

vaishali..... a nyc blog created by u...it clearly shows ur hardwork+ur heart's elation n feelings...

DIS BLOG ROCKS ALONG VID U...!!!!!

ur feelings hav been imprinted by u in dis blog.....vich r true from the core..!!!

BEST OF LUCK.