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11/25/2015

दर्द - ए -ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी ......
सबकुछ खोकर बहुत कुछ पाया तुझसे
आँसू , बैचेनी , दर्द और अकेलापन
यही तो असली विरासत है  ......
जो खोया वो मेरा था ही कहाँ
होता तो क्या यूँही खो जाता ??
इतना सब पा कर भी  ...
रास नहीं आती ज़िन्दगी
यूँ दूर दूर जाती है कि
पास नहीं आती ज़िन्दगी
खामोश लब आँसू भरे नैना
दर्द है पास  .....
फिर क्यूँ डराती है ज़िन्दगी ??
गम के साये हैं,अँधेरे घिर आये हैं
रोशनी से घबराती है ज़िन्दगी
अहं की दीवार बनाई
.... "मैं "को ये रास आई 
इस दलदल में फंस गयी ज़िन्दगी

इतना सब पाने की चाह  में
जाने कहाँ खो गयी ज़िन्दगी  !!

Vaisshali ......
24/11/2015
12.30 noon

8/10/2013

Maya-Jaal

न साथ हूँ , ना अकेली हूँ ,
यह कैसी अजब पहेली हूँ !

ना खुश हूँ ना ग़मगीन हूँ ,
बस खुद में ही तल्लीन हूँ !

ना पास हूँ ना दूर हूँ,
में कितनी मजबूर हूँ !

ना कोई अपना है ना कोई पराया,
सब खेल हैं , सब है माया !

ना सुलझी हूँ, ना उलझी हूँ ,
बस जाल में कहीं फँसी हूँ !

ना कोई दोस्त हैं ना कोई दुश्मन ,
किसे माने अपना, यह मन !

ना दुःख है ना कोई परेशानी ,
यह ज़िन्दगी लगती है बे-मानी !

ना कोई प्रश्न है ना कोई जवाब,
फिर भी दे ज़िन्दगी को हम हर-पल का हिसाब !!

------------------- वैशाली -----------------------------------

8/8/2013

Kashmakash






"zindagi na jaane kyun humse rooth gayi
hath se hi jaano choot gayi
bikhar gaye hain sapne saare
roshni sab kho gayi ....

dil kehta sanjo isse
hausla kahan se laun ?
mann ko kaise mein manau?
dil ka dard kise sunau ?

dil aur dimag ki azeeb hai yeh zad-o-zehad
toot gayi hai umeed saaari
kho di abb saari himmat e
jaane kiska hai intezaar
yamm chahe kab le bula..
chah kar bhi na chahna
kaisi hai yeh kashmakash
koi to bataye mujhe..
iss jaal se chudaye mujhe.."

..................VAISSHALI ..........................
9/8/2013

3/16/2013

अलादीन का जादुई चिराग-3 :- कठिनाइयाँ या सरलता ??



जीवन लहरों सा होता है, कभी बहुत तेज़ तो कभी शान्त। उतार और चढ़ाव, ये  जीवन के अभिन्न अंग है। हम चाहे तो भी इनसे दूर नहीं नहीं जा सकते। वैसे भी प्रकृति का नियम है कि  हम जिस चीज़ या बात से जितना दूर भागते है वही हमारे उतने ही नज़दीक आ जाती है।

        लाखों  लोग है दुनिया में जो ऊँचाई  छूने  की आकांक्षा रखते है किंतु  कुछ ही लोग उसे छू  पाते है, बाकि सभी किस्मत के ऊपर  इल्जाम  लगा कर अपने मन को संतोष दे देते है। किन्तु यह सत्य नहीं है, किस्मत ,वक़्त  - ये शब्द  बहाने है , अपनी हार न मानने और अपनी हार का हार किसी और को पहनाने के लिए।  सत्य यह है कि  - हमारे जीवन में हमारे कार्य से जुडी हर एक नाकामयाबी हमारी अपनी है, 99 % हम अकेले ही जिम्मेदार होते है। 

       हम सपने तो बहुत देखते है, देखना भी चाहिए।  सपने, मंजिल पर पहुँचने की पहली सीढ़ी मात्र है।   हमे समझना होगा की यह सीढ़ी मात्र है , मंजिल नहीं।  क्यूंकि  " सपने सिर्फ देखने मात्र से पूरे नहीं हॊते, कार्य करने से पूरे होते है। "  उन्हें पाने के लिए सही दिशा में, सही तरीकों  से निरंतर प्रयास करना जरूरी होता है।  असफल होना बुरा नहीं किन्तु असफल होने के कारण  खोजने जरूरी है, जो अनेको हो सकते है , जैसे - शायद दिशा ही गलत चुनी हो, कार्य करने के तरीको में कमी हो, मेहनत  में कमी रह गयी हो, या हमे खुद पर ही    १०० % विश्वास न हो, या जो कार्य हम कर रहे है वह हमारी आत्मा की आवाज़ न हो। 

            एक सर्वे के अनुसार भारत देश में अधिकतर लोग वह काम करते है, जो उन्हें करना पड़ता है, अर्थात वो अपने दिल से नहीं , अपनी पसंद का नहीं बल्कि परिवार के कहने पर या किसी अपने के कहने पर या परिस्थिति वश करना पड़ता है। ऐसे किये हुए काम सिर्फ काम बनकर ही रह जाते है , ऊंचइयो पर नहीं पहुचाते । हमे अपना काम अपनी रूचि के अनुसार चुनना चहिये। 

              ज़िन्दगी की जंग में कभी हार तो कभी जीत होती है। हार तब होती है, जब हम मान लेते है। न मनो तो हार मुमकिन ही नहीं है।  कहा ही गया है कि - " मन के हारे हार, मन के जीते जीत "।  हम अपने अवचेतन मन में क्या सन्देश भेजते है, उसी पर हमारी हार और जीत संभव होती है। यदि हम कठिनाई पर ध्यान देंगे तो वही बार बार आएगी और यदि हम उस पर ध्यान न देते हुए यह सोचे की इस से निकलने के और क्या रास्ते है ?, तो हमे यकीनन राह मिल जाएगी । हम क्या सोचते है इस पर हमारी कामयाबी और नाकामयाबी दोनों ही टिकी हुई है। यदि हम दिल से यह मान ले की सब कुछ सरल है , आसान  है तो सच मानिये, आपकी वह कठिनाई , सरलता में बदल जाएगी । पर बात बस इतनी ही है कि  वह सोच,वह आवाज़ दिल से आनी  चाहिए, पूरा विश्वास होना चाहिए ।
             
 दुनिया में सच मने तो ऐसी कोई कठिनाई नहीं है जो हमे कुछ अच्छा  न देकर गयी हो।  सही मायनो में कठिन कुछ होता ही नहीं है , वह तो बस हमारे दिमाग की उपज है। हम राह  में आई रूकावटो को किस रूप में लेते है यह हमारी सोच का ही परिणाम है ..मान लो तो पहाड  है ,नहीं तो कंकर ।  यदि हम ज़िन्दगी के सबक सीखकर आगे नहीं बढ़ते है तो इसमें " भगवन जी " या हमारी " किस्मत" का कोई दोष नहीं है।  सब कुछ दुनिया में आसन है / सरल है  , बस मन में विश्वास होना चहिये। " इरादे पक्के हो तो राहें  बन ही जाती है "।  ठान  लो तो सब कुछ सरल है , आसान है । 

         जीत कठिनाई में नहीं , सरलता में है। जीतना है तो सबकुछ सरल करना सीख लेना चहिये। क्यूंकि दुनिया में बहुत से लोग ऐसे है जिनके लिए वही काम सरल है जो आपको कठिन जान पड़ता है। सोचकर देखिएगा तो जान जायेंगे कि  कुछ भी कठिन नहीं है। 

" दिल की आवाज़ को पहचान लो , 
   मन में बसा लो,एक नई  पहचान लो ।"
         

5/23/2012

ISHARAA

इशारा 


इकरार - इन्कार है नैनों  की जुबान 
दिल की गहराइयों में है  इसकी लगाम !

आँखों  को पढ़  लो जुबां  हम  ना  खोलेंगे 
दिल  को  टटोल  लो इशारों  से ना  बोलेंगे !

खुद  समझ  जाते  तो  ना  तरसते 
कुछ  कह  जाते  तो हम  भी  बहकते 
कुछ  कहा  होता तो  हम  जान  जाते 
तेरी  मोहब्बत  को पहचान  जाते !

खुदा तो देता है अनगित  इशारे 
काश  ! के तुम उनको आवाज़  दे पाते !!

                                                                 vaisshali 

2/17/2012

पर्दानशी

नैनों की जुबां , हाल - ए - दिल 
कैसे बायाँ करू सामने  उनके 
कभी जुबां  तो कभी नैन
    साथ नहीं देते 
बनके गुमनाम पाया उनको 


तो लगा -


गुमनामी  की शख्शियत
है असली शख्शियत
होके पर्दानशी , हमने ज़िंदगी  पा ली 

9/03/2011

Chahat

सब कुछ भूल जाना चाहती हूँ ....
न ज़िन्दगी को याद आना चाहती हूँ !!

न दिल न यादें कुछ नहीं है ज़िन्दगी में
बस अब 
कही जाकर सो जाना चाहती हूँ !!


न शौक बचे न अरमान रहे
दर्द कुरेद कर रो जाना चाहती हूँ !!

मुझको अपनी शरण में ले लो 'ओशो"
तुमको पाकर दुनिया को खो जाना चाहती हूँ !!

1/24/2010

ADAA




हमने बसाया एक बाग़ अरमानो का,

सोचा था आबाद करेंगे
क्या पता था एक अजनबी,
बन दोस्त उससे बर्बाद करेंगे!

टूट गए ख्वाब सारे,
बिखरा तिनका तिनका
मगर नहीं अफ़सोस उनको,
कसूर था जिनका !

ज़िन्दगी बिखरी लड़ मोती सी,
चाहा बहुत पिरोलू इसे
देखकर दोस्ती का आइना ,
धोखे  की चक्की में हम पिसे !

ज़रा नहीं इल्म उनको
क्या यह भी एक मुखौटा है?
जानकार अनजान बनना
यह अदा है या धोखा है ??





11/28/2009

Do Raahein

मेरी ज़िन्दगी में दो राहो का बहुत महत्व है  क्यूंकि अक्सर मैं अपने आप को वहीँ पाती हूँ . यूँ लगता है की ज़िन्दगी दो राहो में बट  कर रह गयी है . हर वक़्त किसी एक का चुनाव करो, बहुत मुश्किल है.
बात जब सिनिअर्स और सही बात के लिए आवाज़ उठाने की हो तो क्या करे कोई ? यदि सबके बीच सही बात को उठाये , तो पता ही है की उनको अच्छा नहीं लगेगा . सशक्त पद हमेशा सशक्त व्यक्ति पर हावी होता है . सब एक अच्छा कार्यकर्ता चाहते है पर वह अनुयायी होना चाहिए . बिना बात को बढ़ाये या झगडा किये क्या किया जाये? पीछे हटा जाये?गलत को अनदेखा किया जाये?या फिर चाहे कुछ हो अंजाम ,आवाज़ उठाई जाये ? क्या पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर अच्छा है? साथ ही जंगल के राजा आपकी अनदेखी करे , आप ख़ास से आम बन जाये -यह सही है?
"मुंह पे बोला तो आप अलग-थलग पड़ जाओगे ,
और हाँ में हाँ की तो भीड़ में चलता पाओगे !"

दोस्तों से गुजारिश है की कुछ रौशनी दिखाए .....