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11/25/2015

दर्द - ए -ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी ......
सबकुछ खोकर बहुत कुछ पाया तुझसे
आँसू , बैचेनी , दर्द और अकेलापन
यही तो असली विरासत है  ......
जो खोया वो मेरा था ही कहाँ
होता तो क्या यूँही खो जाता ??
इतना सब पा कर भी  ...
रास नहीं आती ज़िन्दगी
यूँ दूर दूर जाती है कि
पास नहीं आती ज़िन्दगी
खामोश लब आँसू भरे नैना
दर्द है पास  .....
फिर क्यूँ डराती है ज़िन्दगी ??
गम के साये हैं,अँधेरे घिर आये हैं
रोशनी से घबराती है ज़िन्दगी
अहं की दीवार बनाई
.... "मैं "को ये रास आई 
इस दलदल में फंस गयी ज़िन्दगी

इतना सब पाने की चाह  में
जाने कहाँ खो गयी ज़िन्दगी  !!

Vaisshali ......
24/11/2015
12.30 noon

9/27/2015

क्यूँ ??

क्यूँ भटकता है कोई ?
    अपनी जमीन छोड़ कर
    गैरों की राह में पनाह में

क्यूँ गिरता है कोई ?
   दूजे की बाँह में
   अपनो के आगोश से 

क्यूँ ढूंढता है कोई ?
    कांधा, सहारा के लिए
    खुद बेसहारा होकर

क्यूँ करता है आशा कोई ?
    रुमाल की, आँसू देने वाले से
    खुद उस से ही दुखी होकर

ऐ दिल मान जा कहा ....
    मत कर गैरो पे विश्वास
    यहाँ अपने ही अपने न हुए  !!


------- वैशाली -------
26/09/2015
2:35 Mid-Ni8

    
 

9/26/2015

दिल और दीप जलते हैं .....

बैरी सजन मुझे तड़पाए
सपनो को कुचल कर मुस्काए
जब जब सँजू मैं उसके लिए
जालिम तब तब आँख फिराए
रात खड़ी मैं लिए होंठो पे गीत
आए न साजन रैना यूँ ही गयी बीत
सताकर अनजान बनना है उनकी अदा
झट से बुरा मान जाते है वो सदा
कैसे समझाऊ कितना दुःख होता है मुझे
काश ! कसमें -वादे निभाने आते तुझे
कितना रोकूँ पर दिल कहाँ मानता है
छलक जाते है आँसू दिल कट जाता है
बस यूँ ही मुझे जीना होगा
खून के घूँट पीना होगा
कदर करोगे मेरे जाने के बाद
क्या करोगे जब आएगी मेरी याद
मेरी दीवानगी तुझको सताएगी
तेरी बेरुखी तेरा दिल जलाएगी
तब पछता  के कुछ न पाओगे
यादों में फिर जीना सीख जाओगे
खोकर लोग फिर कहाँ मिलते हैं
बस फिर दिल और दीप  जलते हैं  … !!

----- वैशाली ------
26 /09 /2015
11. 00 AM