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5/23/2012

ISHARAA

इशारा 


इकरार - इन्कार है नैनों  की जुबान 
दिल की गहराइयों में है  इसकी लगाम !

आँखों  को पढ़  लो जुबां  हम  ना  खोलेंगे 
दिल  को  टटोल  लो इशारों  से ना  बोलेंगे !

खुद  समझ  जाते  तो  ना  तरसते 
कुछ  कह  जाते  तो हम  भी  बहकते 
कुछ  कहा  होता तो  हम  जान  जाते 
तेरी  मोहब्बत  को पहचान  जाते !

खुदा तो देता है अनगित  इशारे 
काश  ! के तुम उनको आवाज़  दे पाते !!

                                                                 vaisshali 

11/28/2009

Do Raahein

मेरी ज़िन्दगी में दो राहो का बहुत महत्व है  क्यूंकि अक्सर मैं अपने आप को वहीँ पाती हूँ . यूँ लगता है की ज़िन्दगी दो राहो में बट  कर रह गयी है . हर वक़्त किसी एक का चुनाव करो, बहुत मुश्किल है.
बात जब सिनिअर्स और सही बात के लिए आवाज़ उठाने की हो तो क्या करे कोई ? यदि सबके बीच सही बात को उठाये , तो पता ही है की उनको अच्छा नहीं लगेगा . सशक्त पद हमेशा सशक्त व्यक्ति पर हावी होता है . सब एक अच्छा कार्यकर्ता चाहते है पर वह अनुयायी होना चाहिए . बिना बात को बढ़ाये या झगडा किये क्या किया जाये? पीछे हटा जाये?गलत को अनदेखा किया जाये?या फिर चाहे कुछ हो अंजाम ,आवाज़ उठाई जाये ? क्या पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर अच्छा है? साथ ही जंगल के राजा आपकी अनदेखी करे , आप ख़ास से आम बन जाये -यह सही है?
"मुंह पे बोला तो आप अलग-थलग पड़ जाओगे ,
और हाँ में हाँ की तो भीड़ में चलता पाओगे !"

दोस्तों से गुजारिश है की कुछ रौशनी दिखाए .....