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8/10/2013

Maya-Jaal

न साथ हूँ , ना अकेली हूँ ,
यह कैसी अजब पहेली हूँ !

ना खुश हूँ ना ग़मगीन हूँ ,
बस खुद में ही तल्लीन हूँ !

ना पास हूँ ना दूर हूँ,
में कितनी मजबूर हूँ !

ना कोई अपना है ना कोई पराया,
सब खेल हैं , सब है माया !

ना सुलझी हूँ, ना उलझी हूँ ,
बस जाल में कहीं फँसी हूँ !

ना कोई दोस्त हैं ना कोई दुश्मन ,
किसे माने अपना, यह मन !

ना दुःख है ना कोई परेशानी ,
यह ज़िन्दगी लगती है बे-मानी !

ना कोई प्रश्न है ना कोई जवाब,
फिर भी दे ज़िन्दगी को हम हर-पल का हिसाब !!

------------------- वैशाली -----------------------------------

8/8/2013

8/04/2011

Dard...

हमदर्द चाहा तो दोस्त भी न मिला
हम कहीं छूट गए दर्द ही दर्द मिला!

ये रिश्ते , ये प्यार, ये राज़ की बातें
समझ न पाए हम यार की बातें

क्या पता था है यह मजाक उनके लिए
हम तो असल में उन्हें दिल दे दिए !!

हम तो असल में उन्हें दिल दे दिए !!