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7/24/2014

मृग मरीचिका



मृग  मरीचिका बनके 
न जाने क्या ढूँढती हूँ मैं ?

कस्तूरी का एहसास है मुझे 
न  जाने किसकी प्यास हैं !

बैचैन हूँ ,परेशान हूँ 
हालात  से बेजार हूँ मैं 

हज़ारों अनसुलझे हैं सवाल 
सुलझाने घूमती हूँ मैं  !!

मृग  मरीचिका बनके 
न जाने क्या ढूँढती हूँ मैं ?

8/04/2011

Intezaar

वोह जाने जो करे इंतज़ार,
कैसे होता है यह मन बेक़रार,
हर पल उठते-गिरते सवाल,
नज़रो का तकना, पलकों का झपकना
खयालो में खो जाना होश का फाख्ता होना,

यह होता है इंतज़ार इंतज़ार और इंतज़ार !!