1/09/2015

तू और तेरी आवाज़


"तेरी आवाज़ का क्या मायाजाल है ?
न सुनु तो बैचैनी , सुनकर बेताबी बढ़ जाती है ,
ना  सुनु तो धड़कन रुक जाती है 
सुनु तो धड़कन बढ़ जाती है 
फ़ोन न उठाओ तो ग़ुस्सा लाजमी है 
अचानक रख दो तो बढ़ना वाजबी है 
करू तो मैं अब क्या करू ?
यूँ लगता है ...... 
हर पल बात करती रहूँ 
काश !! के ऐसा हो.……। 
तू कहे मन में , मैं सुनु दिल में 
दिल हमारा लगा रहेगा 
यूँ ही वक़्त गुजर जाएगा 
हम रहे हरदम साथ 
हो जग में 
हमारी दीवानगी की बात "

---------- वैशाली ---------
9/01/2015
10:20 Am

2 comments:

Dr. Dhirendra srivastava said...

तू कहे मन में , मैं सुनु दिल में
दिल हमारा लगा रहेगा..bahut khoob..Vaisshali..

Vaisshali said...

dhanyawaad Dr Dhirendra ji