11/23/2014

पहली मुलाकात


कैसी होगी अपनी पहली मुलाकात ?
न जाने कब कहाँ होगी
आमने सामने बात । 
क्या होगा जब नज़रे मिलेंगी-
-पहली पहली बार ।
सोच कर ही दिल धड़कता है,
फिर भी ना जाने क्यों
मिलने को तड़पता है ।
शर्म होगी एक झिझक होगी
रूमानी सी कैफियत होगी
दिल के तार झंझना उठेंगे
जब वह हमारी तारीफ करेंगे ।
जुड़ेंगे दो दिलो के तार
जब मिलेंगे हम पहली बार ॥
इस दिल को है अब बस
बेसब्री से उस पल का इंतज़ार !!

तुमसे दूर न जाऊँगी

ठान ली है मैंने ,
प्यार की कसमें अकेले निभाऊंगी  |
दर्द दे कर थक जाओगे,
पर मैं हँसती जाऊँगी  |
तुमने किया था एक तरफ़ा,
मैं पुल बन जाऊँगी  |
दूर रहने की करो कोशिश,
मैं यादों में सताऊँगी  |
रखो मसरूफ खुद को
पन्नो पर छा जाऊँगी  |
जो उठाया जाम तुमने,
छलक छलक जाऊँगी  |
काली स्याह रातों को
ख्वाबों में आऊँगी  |
कप से उठते धुँए में
मैं ही नज़र आऊँगी |
सर्द सवेरों में अबकी
चाय ठंडी कर जाऊँगी  |
कर लो जतन ओ मेरे सनम
पर तुमसे दूर न जाऊँगी  |
पर तुमसे दूर न जाऊँगी ॥

11/05/2014

भूल जाना चाहती हूँ मैं !!

भूल जाना चाहती हूँ मैं

      अपनी ज़िन्दगी को 

      तेरे मेरे प्यार को 
       तेरी झूठी  कसमों को 
     तेरे न निभाए वादों को
     तेरे  झूठों को ,फरेबों को 
    तेरे दिए हुए हर दर्द को 
    तेरी आवाज़ सुनने की बैचैनी को 
    तेरे लिए किये इंतज़ार को  !!

   मेरे तड़पते हुए दिल को ,
   मेरी जागती हुई रातों को,
   मेरे बिस्तर की सिलवटों को,
  मेरे गीले होते गिलाफ़ो को !!

हर एक बात को ,
हर एक जज़्बात को,
हर एक याद को ,
हर एक फ़रियाद को  !!

बस  अब भूल जाना चाहती हूँ मैं 
तुझको -खुदको , अपनी ज़िन्दगी को !!

भूल जाना चाहती हूँ मैं !!

11/03/2014

बेपरवाह सनम

वाकिफ़ हूँ तेरी मसरूफ़ियों से ,
तेरी वफ़ा पे है ऐतबार मुझे !
तेरे वादों  से है गिला मुझे 
मेरे ऐतबार का दे तू सिला मुझे !!

जानती हूँ करता होगा तू निभाने की कोशिश 
 न जाने क्यों पीछे छूट जाती हूँ मैं ,
सारी  दुनिया की हैं परवाह तुझे 
 जाने क्यूँ याद नहीं आती हूँ मैं ?

ये इंतज़ार , ये तन्हाई ,
अब नहीं निभायी जाती मुझसे 
अब तू भी 
कर ले किनारा मुझसे 

शायद ये भी मैं सह न पाऊँ 
पल भर भी जी ना पाऊँ 
इस दर्द से मरने का दर्द काम होगा 
फिर तेरी वादा-खिलाफी का भी गम न होगा !! 

--------------- वैशाली --------------------
3/11/14
9:15 AM